Shri Vitthal and Rukmini Mata Darshan Live Darshan (Pandharpur )

श्री विट्ठल और रुक्मिणी माता दर्शन लाइव दर्शन (पंढरपुर)


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Shri Rukmini Live Dardhan

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🌹🙏🌹अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज योगिराज परब्रह्म श्री सचिदानंद सतगुरु साईनाथ महाराज की जय 🌹🙏🌹* *🌹🙏🌹Anant koti Brahmaand nayak Rajadhiraj yogiraj Parbraham shri Sachidanand Sadguru Sainath Maharaj Ji ki Jai🌹🙏🌹*🌹🙏🌹🌹🙏 Saidatt 🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏

प्रेम का मतलब कोई रिश्ता या संबंध बन जाना नहीं,


प्रेम का मतलब कोई रिश्ता या संबंध बन जाना नहीं, 

"प्रेम का मतलब कोई रिश्ता या संबंध बन जाना नहीं,
प्रेम का तो मतलब है-
कण कण में बिखरकर आनंदित हो जाना|"
**********************
इसका अच्छा उदाहरण है हमारा शरीर|हम अपने पूरे शरीर में फैले हुए हैं|शरीर के कण कण में बिखरकर आनंदित हैं|जैसे कण कण में भगवान वैसे शरीर के कण कण में हम|कोई अंग पराया नहीं|चोट लग जाय तो कैसे प्रेम से सहलाते हैं|

ऐसा भी होता कि किसी और के शरीर को चोट पहुंचायी जाय|यह जडता है|व्यक्ति अपने शरीर में ही पूर्णता से रहे तो काफी है|जो ब्रह्माण्ड में है वही पिंड में है|इसमें रम जाना हमे साधना के शिखर तक पहुंचा सकता है|
यही ईश्वरीय प्रेम की अनुभूति करा सकता है जो ब्रह्माण्ड में व्याप्त है|वहाँ फिर कण कण में ईश्वरीय प्रेम समाया है|कृष्ण कहते हैं-मुझे सबका सुहृद् जाननेवाले को शांति हो जाती है|'

क्यों न हो, कुछ भी अलग है नहीं|यह ऐसा है जैसे हमारे हाथपांव में पृथकता बुद्धि आ जाय, वे सोचने लगें हमारे भीतर उनके प्रति प्रेम है या नहीं?
 
हम कहें-सुहृद् हैं हम, अकारण प्रेम करने वाले, हित करने वाले|
तो उन्हें शांति हो जाय कि ये तो हमारे अपने हैं, सचमुच हमारा हित चाहने वाले हैं|
हमसे कोई पूछे-क्या तुम्हें विश्वास है, क्या सचमुच तुम अपने शरीर के प्रत्येक अंग को चाहने वाले हो?
तो हम क्या कहेंगे? हम कहेंगे-इसमें विश्वास की क्या बात है! यह तो है ही|
इस तरह"सुहृदं सर्वभूतानाम्" कहने वाले कृष्ण कहेंगे-इसमें विश्वास की क्या बात है, यह सब मैं हूँ ही, मेरा अपना विस्तार है|अपने से दुराव कैसा?
यह समझ में आ जाय तो ईश्वर और ईश्वर का प्रेम प्रत्यक्ष है|
कृष्ण कहते हैं-"जो संपूर्ण भूतों में मुझे देखता है और संपूर्ण भूतों को मेरे अंतर्गत देखता है उसके लिए मैं अदृश्य नहीं होता हूँ और वह मेरे लिए अदृश्य नहीं होता|"
हम कहते हैं कहां छिपे हैं भगवान, दिखाई क्यों नहीं देते?
तो भगवान ही कहते हैं- मैं सबमें हूं, सब मुझमें है|'
यह बड़ी बात है|ईश्वर अंशी है तो अंश रुप में हम भी कह सकते हैं- मैं शरीर के सभी अंगों में हूँ, सभी अंग मुझमें हैं|'
यह व्यवस्था हर अंश में है|
पशु पक्षी के शरीरों में भी जो ईश्वर अंश मौजूद है वह उनके शरीरों के सभी अंगों में है, सभी अंग उसमें है|
इसका सीधा अर्थ है जैसे हम वैसे सब|यहाँ समझ की जरूरत पडती है|फिर किसीको भी हानि नहीं पहुंचाई जा सकती, फिर सबकी सेवा ही होती है|
जैसा आत्म प्रेम मुझमें है वैसा आत्म प्रेम सभी के अंदर है|कौन करता है आत्म घृणा? करता हो तो वह मनोरोगी है|आत्म घृणा भी वह आत्म प्रेम के कारण करता है|कहीं स्वयं के लिए तो प्रेम है ही भीतर|
इसका विस्तार होना चाहिए, मनोरोगी विस्तार नहीं कर पाता|वह मनके किसी खांचे में कैद जैसा है|एक सामान्य व्यक्ति ठीक है वह अपने पूरे शरीर से प्रेम करता है|
वह भी अधूरा है जब तक वह पूरे विश्व के कण कण में बिखरकर आनंदित नहीं हो जाता|उसकी हृदय ग्रंथि विलीन हो जाती है, हृदय सर्वत्र व्याप्त हो जाता है|
मनुष्य जो इतने कष्ट पा रहा है उसका कारण मैं मेरा के रूप में हृदय ग्रंथि ही है|
मैं अलग, मेरा अलग|
जब वह प्रेम के बारे में सुनता है तो वह संभव प्रतीत नहीं होता क्यों कि-
"प्रेम चिरकाल तक कष्ट सहन करता है और दयालु है|प्रेम ईर्ष्या नहीं करता|प्रेम अपनी बडाई नहीं करता, न फूल कर कुप्पा होता है|प्रेम अपनी भलाई नहीं चाहता, उद्विग्न नहीं होता, न बुरा सोचता|वह सब बातें सह लेता है, सब बातों पर विश्वास करता है, सब बातों की आशा रखता है और सब बातों में धैर्य रखता है|प्रेम कभी असफल नहीं होता|"

यहाँ तक कहते हैं कि-
"ईश्वरीय विधान भी प्रेम के आगे नतमस्तक है|"
ग्रहों से विचलित होने वाले बहुत हैं|शनि की साढेसाती सुनकर बहुत लोग घबराते हैं|उनके जप तप शुरू हो जाते हैं|साढेसाती न सही, कोई और कष्ट सही लेकिन आदमी घबराता सिर्फ इसलिए है क्योंकि प्रेम नहीं है|
अहंकार का सुख जिसे चाहिए वह प्रेम से दूर ही रहता है|उसके लिए प्रेम भी किसी पर मेहरबानी करने के अर्थ में है|ऐसा अहं सुख, दुख मे बदले बिना नहीं रहता|सुखदुख के सारे द्वंद्व अहंकार को लेकर हैं|
प्रेम निर्द्वन्द्व है|

"प्रेम संसार का स्थायी सत्य है|प्रेम अंत:करण का अमृत है जो विकसित होकर विश्व प्रेम और प्राणीमात्र तक फैल जाता है|प्रेम में मनुष्य की जीवनधारा बदलने की शक्ति होती है|प्रेम बेगानों को अपना और शत्रुओं को भी मित्र बना लेता है|शुद्ध प्रेम के लिए दुनिया में कोई बात असंभव नहीं है|"

अगर स्वार्थी बुद्धि से ही सही, प्रेम के फायदे जानकर भी कोई इस दिशा में कदम रखता है तो सारे दुख, दुर्भाग्य हाथ जोडकर खडे हो जाते हैं|आदमी जिनके वश में होता है, वे आदमी के वश में हो जाते हैं|
हो सकता है मुझमें भी प्रेम न हो तथा दुख अप्रिय लगता हो तब मेरे लिए भी यही सत्य है|ऐसा नहीं कि यह केवल पाठकों के लिए ही है|
मुझमें प्रेम नहीं है तो कठिन तो है लेकिन इसका महत्व समझ में आ जाना बहुत बड़ी बात है|यह स्वतंत्र करने लगता है फिर कोई मुझसे प्रेम न करे, सारा संसार मुझसे प्रेम न करे तो भी कोई फर्क नहीं पडता क्यों कि मुझे समझ में आ चुका है|

सदुपदेश देने वाले की यह तकलीफ है, उसे अपेक्षा हो जाती है कि लोग उसे मानें|
न मानें तो पीड़ा होती है|
होना यह चाहिए कि वह अपने ज्ञान द्वारा अपने को स्वतंत्र करे फिर जिसका जैसा है ठीक है|सात्विक, राजसी, तामसी बुद्धि में बंटे बहुत लोग हैं|कोई माने उसकी मर्जी, न माने उसकी मर्जी|वह हमारा विषय नहीं होना चाहिए|हमें समझ में आ गया कि प्रेम से व्यक्तिगत, सामूहिक कितने बड़े लाभ हैं तो फिर ठीक है|कठिन होते हुए भी कोशिश होगी जैसे एक सामान्य व्यक्ति भी कार्य कठिन होने पर भी कोशिश करता है , उसके फायदे जो हैं|
इसलिए सांसारिक स्वार्थ की दृष्टि से ही सही जो आध्यात्मिक मूल्य लाभ देने वाले हैं उन्हें जीवन में अपनाने की कोशिश करनी चाहिए|लाभ समझ में जिसके आया वह कोशिश करता ही है उसे प्रेरणा देनी नहीं पडती, वह खुद प्रेरित होता है|स्वार्थ क्या नहीं करता!
 
प्रेम ही प्रार्थना है|आदमी भय, चिंता, शंका की यातना झेलता रहता है, उसे याद ही नहीं आती कि सब सुखी हों ऐसा भाव उसके हृदय में हों तो इन सभी रोगों से आसानी से मुक्ति पायी जा सकती है|
तब प्रेम, राग-मोह- आसक्ति का रुप भी नहीं लेता|
प्रेम के पर्याय के रूप में करुणा, दया, वात्सल्य, स्नेह, सहानुभूति, सेवा, परोपकार, त्याग, क्षमा आदि ठीक होते हैं|बेठीक है तो वह है इनकी अनिच्छा|इस अनिच्छा के कारण घोर असंतुलन पैदा होता है|और आदमी अनसुलझे प्रश्नों में ही अपनी जीवनयात्रा जारी रखता है|

कठिन है उसमें कोई हर्ज नहीं, प्रयत्न से कठिन भी सरल होता है लेकिन अनिच्छा है, अस्वीकार है तो फिर आदमी खुद ही अपने हित का द्वार बंद कर लेता है|वह अपना ही शत्रु होता है, और इस भ्रम में रहता है कि वह अपना मित्र है|
ऐसा आदमी "सुधारक", "उद्धारक" भी हो जाता है परन्तु उद्धार तो वही करता है जो किसी को दोषी मानता ही नहीं|
सभी को उससे राहत होती है|रास्ते में आयी रुकावट दूर हो जाती है|
खुद कृष्ण दोषी नहीं मानते|वे कहते हैं-जीव तो कर्ता है ही नहीं, कर्ता तो प्रकृति के गुण हैं|वह अज्ञानवश स्वयं को कर्ता मान लेता है|'
उस दृष्टि से भूल, बेहोशी, अज्ञान, सत्य का पता न होना ही दोष है|मगर पता ही नहीं है तो उसे दोषी कैसे माना जा सकता है?
इसका अर्थ है-

"दुनिया में कोई भी बुरा नहीं है|सभी अपने मूल रूप में भले हैं|"
भला जानने पर भला करना संभव है, प्रेम संभव है|









श्री मकर संक्रांतीचे महत्व, पूजाची माहिती व दान व महत्व:-


श्री मकर संक्रांतीचे महत्व, पूजाची माहिती व दान व महत्व:-

मकर संक्रांत हा पौष महिन्यातील सौभाग्यवती स्त्रीयाचा अतिशय महत्त्वाचा सण आहेत , यावर्षी दिनांक १४ ला भोगी, १५ ला मकर संक्रांति, १६ ला किंक्रांत हे मंगलमय सण हा तीन दिवस साजरा करण्यात येणार आहे

संक्रांतीचे महत्त्व व पुराणात उल्लेख:-

फार वर्षापुर्वी संकारसुर नावाचा एक राक्षस होता. तो लोकांना फार पीडा देई. त्याला मारण्यासाठी देवीने संक्रांतीचे रूप घेतले. या संक्रांतीदेवीने संकरासुराला ठार केले आणि लोकांना सुखी केले. या दिवशी सुर्य मकर राशित प्रवेशा करतो, हा काळ अत्यंत पुण्यकाळ असतो.

या तीन दिवसी सौभाग्यवती महिला व नववधू ज्या सणाची आवर्जून वाट पाहत असतात तो सण म्हणजे मकरसंक्रांत सूर्याला मकर संक्रमणावर आधारलेला एक भारतात हा सण वर्षभरात बारा राशीतुन सूर्याची चारा संक्रमणे होत असली तरी हिंदुस्थानवासियांच्या दृष्टीने मकरसंक्रमणाला म्हणजे संक्रांतीला अधिक महत्त्व आहे. कारण या संक्रमणापासुन सूर्याला उत्तरायणाला प्रारंभ होतो आणि उत्तर गोलार्धात राहणाऱ्या हिंदुस्थानवासीयांना उत्तरायणामध्ये अधिक प्रकाश व उष्णता याचा लाभ होतो.

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मकर संक्रांतीचे महत्व, माहिती व सौभाग्यवतीनी ही पूजा कशी करावी:-

जानेवारी महिना चालू झाला की नवीन वर्षाची सुरवात होते. नवीन वर्षाचा पहिला सण म्हणजे मकर संक्रांत आहे. तामिळनाडू मध्ये पोंगल म्हणून ओळखला जातो, महाराष्ट्रात मकर संक्रांत म्हणून, पंजाबमध्ये लोहरी म्हणून प्रसिद्ध आहे. गुजरात मध्ये मकर संक्रांतीला पतंग उडवण्याची पारंपारिक पद्धत आहे. प्रत्येक प्रांतामध्ये वेगवेगळी पद्धत आहे.

मकर संक्रांत ही इंग्लिश कॅलेंडर प्रमाणे जानेवारी महिन्यात असते व मराठी कॅलेंडर प्रमाणे पौष महिन्यात असते. 

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भोगी:-
दि. १४/०१/२०२३ रोजी शनिवार पौष कृष्णपक्ष सप्तमी
ह्या दिवशी भोगी हा सण आहे. 

ह्या दिवशी देवाची पूजा करून भोगीची भाजी (मिश्र भाजी), ज्वारीची अथवा बाजरीची तीळ लावून भाकरी बनवण्याची प्रथा आहे. भोगी अजुन मकर संक्रांतीच्या आदल्या दिवसाला भोगी असे म्हणतात. भोगी हा आनंदाचा आणि उपभोगाचा० सण म्हणून मानला जातो. या दिवशी सकाळी आपले घर तसंच घरासभोवतालचा परिसर स्वच्छ केला जातो. दरवाजासमोर रांगोळी काढतात. घरातील सर्व जण अभ्यंगस्नान करून नवीन कपडे परिधान करतात. महिला नवीन अलंकार धारण करतात. सासरच्या मुली भोगीचा आनंदोत्सव साजरा करण्यासाठी या दिवशी माहेरी येतात. कुटुंबातील सर्वजण एकत्र येऊन भोगीचा आनंदोत्सव साजरा करतात. दुपारी जेवणाचा बेतही खास भोगीचा असतो. तीळ लावलेल्या भाकऱ्या, लोणी, पापड, वांग्याचे भरीत, चटणी आणि खमंग खिचडी असा लज्जतदार खास बेत असतो. प्रथम या पदार्थाचा देवाला नैवेद्य दाखवून सर्वजण एकत्र जेवायला बसतात.



श्रीसुर्यनारायण मकर राशी प्रवेश

शके १९४४ शुभकृत् नाम संवत्सर,उत्तरायण , हेमंतऋतु , पौष कृष्णपक्ष(सप्तमी) दि-१४/०१/२०२३ रोजी शनिवार चित्रा नक्षत्रावर अतिगंड योगावर बव करणावर रात्री ०८:४४ मिनिटांनी सूर्य मकर राशीत प्रवेश करतो.

मकर संक्रांत:-

मकर संक्रांती माहिती

या वर्षीची मकर संक्रात शके १९४४ दिनांक १५/०१/२०२३ रोजी रविवार पौष कृष्णपक्ष अष्ठमी

पुण्यकाल:-
संक्रांतीचा पुण्यकाल रविवार १५ जानेवारी २०२३
सुर्योदय सकाळीः-०७ः१६ मी पासुन ते
सुर्यास्त संध्याकाळीः- ०६ः२० मी पर्यंत आहे.
 
या पुण्य काळामध्ये धार्मिक कृत्य दान धर्म इत्यादी करावीत.
बव करणावर संक्रांत होत असल्याने या संक्रांतीचे वाहन वाघ असून उपवाहन घोडा आहे.

वस्त्र परिधाण:-
या संक्रांतिने पिवळे वस्त्र परिधाण केले आहे. हातात गदा घेतलेली आहे.

टिळा:-
केशराचा टिळा लावला आहे

वय:-
वयाने कुमारी असून बसलेली आहे.

पुष्प:-
वासाकरीता जाईचे फुल घेतलेला आहे.

आहार:-
पायस भक्षण करीत आहे व मोती अलंकार धारण केले आहे.
संक्रांति जातीने सर्प आहे.

तिचे वारनांव राक्षसी असून नाक्षत्रनाव मंदाकिनी असून सामुदाय मुहूर्त ३० आहेत.

दिशा:-
ही संक्रांत दक्षिणे कडून उत्तरेस जात आहे व ईशान्य दिशेस पाहत आहे.

संक्रांत ज्या दिशेकडून येते त्या दिशेकडील लोकांना सुख प्राप्त होते व ज्या दिशेकडे जाते व पाहते त्या दिशेकडे लोकांना दुःख व पिडा अशी फले प्राप्त होतात.

संक्रांति पर्वकाळात स्नान , दान धर्म आदी पुण्य कृत्य केले असता त्याचे फल शतगुणित होते.

या पर्वकाळात जी दाने दिली ती भगवान सूर्यनारायणाला प्राप्त होतात व जन्मोजन्मी आपल्याला सुख प्राप्त होते.


पुजा साहित्य:-
पूजेसाठी ५ बोळकी (सुगड), २ पणती, नवा पांढरा दोरा, हळद-कुंकू, नवीन कपडा, तीळ-गुळ, ऊस, गाजर, गव्हाच्या ओंब्या, मटार-हरभरे दाणे, बोर व ताम्हन अथवा स्टीलचे ताट, दिवा व अगरबत्ती घ्यावी.

पाच बोळक्यांना दोरा बांधावा, त्यांना हळद-कुंकू लावावे, त्यामध्ये उसाचे काप, तील-गुळ, गाजर, गव्हाच्या ओंब्या, मटार-हरभरे दाणे, बोर घालावे वरती एक पणती ठेवावी हे सर्व एका स्टीलच्या ताटात ठेवावे वरतून एक नवीन कापड घालून झाकून ठेवावे. समोर निरांजन, अगरबत्ती लावावी. ह्याचा अर्थ माझ्या संसारात धनधान्य, कपडा लक्ता कशाची कमरता पडू नये व माझ्या सुखी संसाराला कोणाची वाईट नजर लागू नये.

संक्रांतीला तिळाचे फार महत्व आहे. ह्या दिवशी महाराष्ट्रात तिळ व गुळ वापरून पदार्थ बनवण्याची प्रथा आहे. तिळाची चटणी, तिळाची वडी, तिळाचे लाडू, तीळ-गुळाची पोळी ह्याचा नेवेद्य बनवतात. घरासमोर सडा घालून रांगोळी काढली जाते.

मकर संक्रांतीला नवीन लग्न झालेल्या मुलीला माहेर कडून काळी चंद्रकळा, हळद-कुंकूचा कोयरी अथवा करंडा देवून तीळ-गुळ वापरून दागिने बनवून तिला परिधान करायला देतात जावई बापूंना चांदीची वाटी तील-गुळ घालून द्यायची प्रथा महाराष्ट्रात आहे. संध्याकाळी महिलांना (सुवासीनीना) घरी हळदी-कुंकूला बोलवून त्यांना हळद-कुंकू अत्तर लावून वाण म्हणून बांगड्या, नारळ, आरसा, एखादी स्टीलची वस्तू, किंवा फळ वाण म्हणून दिले जाते.

मकर संक्रांती ह्या दिवशी एकमेकांनच्या घरी जावून तिल-गुळ देवून आपल्या मनातील क्रोध, लोभ, भांडण विसरून एकमेकांशी गोड बोलायचे व आपल्या स्नेह संबंधातील कटुता नष्ट करून मैत्री कायम करायची असते. म्हणूनच ह्या दिवशी म्हणतात “तील-गुळ घ्या गोड बोला” तसेच एकमेकांना योग्य चांगली दिशा दाखवायची.

संक्रांतीच्या दिवशी लहान मुलांचे बोरन्हाण करायची महाराष्टात पद्धत आहे. ह्या दिवशी लहान मुलांना हलव्याचे दागिने घालून मलमलचे कपडे घालून संध्याकाळी लहान मुलांना घरी बोलवण्याची पद्धत आहे. तेव्हा एका भांड्यामध्ये चुरमुरे, तील-गुळ, साखर फुटणे, बोर, चॉकलेट, मिक्स करून आपल्या बाळाच्या डोक्यावर त्याचा अभिषेक करतात. हा लहान मुलांचा सोहळा अगदी नेत्रदीपक असतो. सर्व लहान मुले गुण्यागोविंदाने ह्या मध्ये भाग घेतात.

संक्रातीच्या दुसऱ्या दिवशी कीक्रांत असते. त्यादिवशी कोणतेही शुभ म्हणजे चांगले कोणते ही काम करू नये.



किंक्रांत:-

दि १६/०१/२०२३ रोजी सोमवार 

पौष कृष्ण ९ ला दिवस कींक्रांत म्हणजेच करिदिन असतो. ह्या दिवशी चांगले कोणते काम करीत नाहीत ह्या दिवशी अजुन किंक्रांत संक्रांतीचा दुसरा दिवस किंक्रात म्हणून साजरा करतात. 
संक्रांतीदेवीने मकर संक्रांतीच्या दुसऱ्या दिवशी किंकरासूर नावाच्या राक्षसाला ठार मारले. आणि त्याच्या जाचातून प्रजेला मुक्त केले. म्हणून हा दिवस किंक्रांत म्हणून पाळला जातो. पंचागात हा दिवस करिदिन म्हणून दाखवलेला असतो. हा दिवस शुभकार्याला घेतला जात नाही. या दिवशीही स्त्रिया हळदी कुंकू समारंभा साजरा करतात.

यंदा १५ जानेवारीला मकर संक्रांत आहे 
 
इ स १९७२ सालापासून सन २०८५ पर्यंत मकर संक्रांत कधी १४ तर कधी १५ जानेवारीला येईल. सन २१०० पासून मकर संक्रांत १६ जानेवारीला येईल. तर ३२४६ मध्ये मकर संक्रांत चक्क १ फेब्रुवारीला साजरी केली जाईल, अशी रंजक माहिती पंचागकर्ते खगोल अभ्यासकाची यांची आहे.

त्यामुळे मकर संक्राती पुण्यकाळ यावेळी १४ जानेवारी रोजी आली असल्याचे त्यांनी सांगितले. नेहमी मकर संक्रांती १४-१५ जानेवारीलाच येते. सुर्‍याने एकदा मकर राशीत प्रवेश केल्यापासून पुन्हा तो मकर राशीत प्रवेश करेपर्यंत तीनशे पासष्ट दिवस सहा तास, नऊ मिनिटे व दहा सेकंद एवढा कालावधी लागतो. ग्रेगरियन कॅलेंडरच्या नियमाप्रमाणे शतकपूर्तीच्या अंकास चारशेनी भाग जात नसेल तर त्या वर्षी `लीप वर्ष’ धरले जात नाही. त्यामुळे दर चारशे वर्षांनी मकर संक्रांतीचा दिवस तीन दिवसांनी पुढे जातो. तसेच दर वर्षीचा नऊ मिनिटे दहा सेकंद हा काळ साठत साठत जाऊन दर १५७ वर्षांनी मकर संक्रांतीचा दिवस आणखी एक दिवसाने पुढे जातो.

सन १८९९ मध्ये निरयन मकर संक्रांती १३ जानेवारीला आली होती. सन १९७१ पासून सन निरयन मकर संक्रांती १४ जानेवारीलाच येत होती. १९७२ पासून सन २०८५ पर्यंत निरयन मकर संक्रांती कधी १४ तर कधी १५ जानेवारीला येईल. सन २१०० पासून निरयन मकर संक्रांती १६ जानेवारीला येईल. अशा रितीने पुढे सरकत सरकत ३२४७ मध्ये निरयन मकर संक्रांती चक्क १ फेब्रुवारीला येणार असल्याचे सोमण यांनी सांगितले आहे. 

मकर संक्रांती ही वाईट नसते. `संक्रांत आली’ हा शब्दप्रयोगही आपण चुकीच्या अर्थ वापरत असतो. दिनमान वाढत जाणे, त्याच दिवशी, शिशिर ऋतुचा प्रारंभ झाला. मकर राशीला तीळगुळ देण्याची प्रथा आहे. तीळ हे थंडीमध्ये शरीराला आरोग्यदायी असताना मतभेद, भांडण, वितुष्ट, द्वेष, मत्सर, अबोला दूर करून मकर संक्रांतीचा सण गोडी, प्रेम वाढवितो. स्नेहाचे नाते निर्माण करतो. मकर संक्रांतीच्या वेळी काही अफवा पसरवितात त्यावर विश्वास ठवू नका तसेच अफवा पसरवू नका असे आवाहनही मी करतो ही विनंती आहे

हळदी कुंकू रथ सप्तमी पर्यंत करता येते.

संक्रांतीच्या दिवशी दान व महत्व:-

या दिवशी दान देण्याला विशेष महत्त्व आहे. देवीपुराणातील हा श्लोक पहा. 

संक्रांतौ यानि दत्तानि दव्यकव्यानि मानवै:। 

तानि नित्यं ददात्यर्क: पुनर्जन्मनि जन्मनि।। 

( मकर संक्रांतीच्या दिवशी जी माणसं दान देतात आणि हव्यकव्ये करतात, त्या-त्या वस्तू सूर्य त्यांना प्रत्येक जन्मात देत असतो) आधुनिक कालात दान देण्याच्या गोष्टींच्या यादीमध्ये विद्यादान, श्रमदान, रक्तदान, वस्त्रदान, अन्नदान, नेत्रदान याही गोष्टींचा समावेश व्हावयास हवा. यादिवशी घरातील आणि गावच्या मंदिरातील देवाला तीळ-तांदुळ वाहतात. सुगडात (सुघटात) गहू, उसाचे तुकडे, हळकुंडे, कापूर, बोरं, दव्य इत्यादी वस्तू घालून ते दान देण्याची प्रथा आहे. 

 जन्म नक्षत्रानुसार सुर्यसंक्रांतिफल : -

१)पंथा (प्रवास):- हस्त, चित्रा, स्वाती

२) भोग: (सुखभोग) : - विशाखा,अनुराधा,ज्येष्ठा,मूळ पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा

३) व्यथा (शरीरपीडा) : - श्रवण ,धनिष्ठा, शततारका
उत्तरा, हस्त, चित्रा

४) वस्त्रम् (वस्त्रलाभ) : - पूर्वाभाद्रपदा , उत्तराभाद्रपदा , रेवती , अश्विनी , भरणी ,कृत्तिका

५) हानि: (नुकसान) : - रोहिनी , मृग , आर्द्रा

६) विपुलं धनम् (विपुल धनलाभ) : पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा,मघा ,पूर्वा, उत्तरा

शास्त्रानुसार मकरसंक्रांतीच्या दिवशी सूर्य धनु राशीतून मकर राशीत प्रवेश करतो. या दिवशी आपले भाग्य उजळविण्यासाठी राशीनूसार काही उपाय करावेत. या उत्तरायणात राशीनूसार दान केल्यास लक्ष्मी तुमच्यावर प्रसन्न होईल आणि तुम्ही मालामाल व्हाल.

मेष -
ज्योतिष शास्त्रानुसार या राशीचा स्वामी मंगळ आहे. त्यामुळे या राशीच्या इच्छापूर्तीसाठी लोकांनी तीळ आणि मच्छरदानीचे दान करावे.

वृषभ -
शास्त्रानुसार या राशीचा स्वामी शुक्र आहे. या राशीच्या लोकांनी मकरसंक्रांतीच्या दिवशी लोकरीचे कपडे व तिळाचे दान करावे.

मिथुन -
या राशीचा स्वामी बुध आहे. हिरवे कापड, तीळ, मच्छरदानीचे दान करावे.
 
कर्क -
या राशीचा स्वामी चंद्र आहे. मकरसंक्रांतीच्या दिवशी या राशीच्या लोकांनी शाबूदाणा आणि लोकरीचे वस्त्र दान करावे.

सिंह -
या राशीच स्वामी सूर्य आहे. मकरसंक्रांतीच्या दिवशी माणिक, गहू, लाल कापड, लाल फूल , गुळ , सोने, तांबे, चंदन दान करावे.

कन्या -
या राशीचा स्वामी बुध आहे, राशीच्या स्वामी ग्रहानुसार तेल, उडीद, तिळाचे दान करावे.

तूळ -
या राशीचा स्वामी शुक्र आहे. या राशीच्या लोकांनी तेल, रुई, वस्त्र, तांदूळ दान करावेत.

वृश्चिक -
या राशीचा स्वामी मंगळ आहे. गरिबांना तांदूळ , खिचडी, धान्य दान करावे.

धनु -
या राशीचा स्वामी गुरु आहे. या राशीच्या लोकांनी तीळ व हरभ-याची डाळ दान केल्यास विशेष लाभ प्राप्त होईल.

मकर -
या राशीचा स्वामी शनि आहे. या राशीच्या लोकांना तिळ, तेल, काळी गाय, काळे वस्त्र यांचे दान करावे.

कुंभ -
ज्योतिष शास्त्रानुसार या राशीचा स्वामी देखील शनी आहे. त्यामुळे या राशीच्या तीळ, साबण, वस्त्र, कंगवा आणि अन्नदान करावे.

मीन -
शास्त्रानुसार या राशीचा स्वामी गुरु आहे. या राशीच्या लोकांनी मध, केशर, हळद, पिवळे वस्त्र यांचे दान करावे.

कणभर तीळ, मनभर प्रेम
गुळाचा गोडवा सोबत ऋणानुबंध वाढवा
तिळगुळ घ्या गोडगोड बोला!मकर संक्रांतीच्या हार्दिक शुभेच्छा…!

मकर संक्रांति 15/01/2023 का पुण्य और महापुण्य काल समय





*🕉️ मकर सक्रांति 🕉️* 
 *15 जनवरी 2023 रविवार* 
 
*इस साल मकर संक्रांति का त्यौहार 15 जनवरी 2023 रविवार के दिन मनाया जाएगा।* 

 ये सूर्य की उपासना का पर्व है, सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर खरमास की भी समाप्ति हो जाती है और सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
 पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं और ऐसे शुभ संयोग में मकर संक्रांति पर स्नान, दान, मंत्र जप और सूर्य उपासना से अन्य दिनों में किए गए दान-धर्म से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।।

*🔯आइए जानते हैं मकर संक्रांति का पुण्य और महापुण्य काल समय-:* 

*सूर्य का मकर राशि में प्रवेश-:* 
14 जनवरी 2023 शनिवार को
रात 08.57 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

*मकर संक्रांति 15/01/2023 का पुण्य और महापुण्य काल समय 

*🔯 पुण्य-महापुण्य काल का महत्व-:* 
मकर संक्रांति पर पुण्य और महापुण्य काल का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं. मकर संक्रांति के पुण्य और महापुण्य काल में गंगा स्नान, सूर्योपासना,दान, मंत्र जप करने व्यक्ति के जन्मों के पाप धुल जाते है।

*स्नान---:* 
मकर सक्रांति वाले दिन सबसे पहले प्रातः किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए, यदि यह संभव ना हो सके तो अपने नहाने के जल में थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान करें।।

*सूर्योपासना---:* 
प्रातः स्नान के बाद उगते हुए सूर्य नारायण को तांबे के पात्र में जल, गुड, लाल पुष्प, गुलाब की पत्तियां, कुमकुम, अक्षत आदि मिलाकर जल अर्पित करना चाहिए।

 *गायत्री मंत्र जप--:* 
 सूर्य उपासना के बाद में कुछ देर आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के जप करने चाहिए, अपने इष्ट देवी- देवताओं की भी उपासना करें।।

 *गाय के लिए दान---:* 
पूजा उपासना से उठने के बाद गाय के लिए कुछ दान अवश्य निकालें जैसे- गुड, चारा इत्यादि।

*पितरों को भी करे याद-:* 
इस दिन अपने पूर्वजों को प्रणाम करना ना भूलें, उनके निमित्त भी कुछ दान अवश्य निकालें। 
इस दिन पितरों को तर्पण करना भी शुभ होता है। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

*गरीब व जरूरतमंदों के लिए दान-:* 
इस दिन गरीब व जरूरतमंदों को जूते, चप्पल, (चप्पल-जूते चमड़े के नहीं होने चाहिए) अन्न, तिल, गुड़, चावल, मूंग, गेहूं, वस्त्र, कंबल, का दान करें। ऐसा करने से शनि और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।।

*परंपराओं का भी रखें ध्यान-:*
 मकर सक्रांति का त्यौहार मनाने में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग परंपराएं हैं, अतः आप अपनी परंपराओं का भी ध्यान रखें। अर्थात अपने क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार मकर संक्रांति का त्यौहार मनाए।।
 
*गायत्री मंत्र-:* 
इस साल मकर संक्रांति बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि रविवार और मकर संक्रांति दोनों ही सूर्य को समर्पित है। इस दिन गायत्री मंत्र जप व गायत्री हवन करना विशेष लाभकारी रहेगा।।
सूर्य गायत्री मंत्र का जाप भगवान सूर्य देव के लिया किया जाता है। इस मंत्र के जाप से सूर्य भगवान को प्रसन्न और उनका आशीर्वाद पाने के लिया किया जाता है। इस मंत्र का जाप सुबह सुबह करनी चाहिए। इसके अधिकतम प्रभाव के लिए इस गायत्री मंत्र का मतलब समझना चाहिए।

ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयत।।

ओम, मुझे सूर्य देव का ध्यान करें,
ओह, दिन के निर्माता, मुझे उच्च बुद्धि दें,
और सूर्य देव मेरे मन को रोशन करें।

मेरे सम्पूर्ण परिवार की तरफ से सभी को मकर संक्रांति (खिचड़ी संक्रांति) पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं हम भगवान सूर्य नारायण जी से प्रार्थना करते हैं की जिस प्रकार मकर राशि में सूर्य नारायण का तेज बढता है उसी प्रकार सम्पूर्ण विश्व का तेज बढ़े सभी लोग स्वस्थ सुंदर और दीर्घायु हो यही कामना भगवान सूर्य नारायण जी से करता हुं।





श्रद्धा और सबूरी यही तो जीवन का मूलमंत्र है - (Shraddha and Saburi)



 


साईं बाबा ने श्रद्धा और सबूरी के रूप में दिया है। जीवन जीने का मूलमंत्र है


श्रद्धा हमें सही राह पर लाती है और संयम पथभ्रष्ट नहीं होने देता। यही तो जीवन का मूलमंत्र है, जो हमें शिरडी के साईं बाबा ने श्रद्धा और सबूरी के रूप में दिया है।


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विजयादशमी के दिन शिरडी के संत साईंबाबा का महाप्रयाण दिवस मनाया जाता है। बाबा ने हमें श्रद्धा और सबूरी (सब्र) के रूप में ऐसे दो दीप दिए हैं, जिन्हें यदि हम अपने जीवन में ले आएं, तो उजाला पैदा कर सकते हैं। श्रद्धा हमेशा व्यक्ति को सही रास्ते की ओर ले जाती है, वहीं संयम से वह उस रास्ते पर टिका रह पाता है।

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जब हम अपने लक्ष्य से भटकने लगते हैं, तब संत ईश्वर के संदेशवाहक बनकर सही मार्ग दिखाते हैं। संतों की श्रृंखला में शिरडी के साईं बाबा का नाम विख्यात है। 15 अक्टूबर 1918 को विजयादशमी के पर्व पर साईंबाबा ने महाप्रयाण किया, किंतु उनका उपदेश श्रद्धा और सबूरी आज भी हमें जीवन जीने की कला सिखा रहा है।

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श्रद्धा ईश्वर तक पहुंचने की सीढ़ी है। शास्त्रों में लिखा है कि भक्त को भगवान से मिलाने की क्षमता केवल श्रद्धा में ही है। ईश्वर आडंबर से नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा से ही सुलभ होता है। श्रीमद्भागवद्गीता (4-39) में कहा गया है- श्रद्धावांल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेंद्रिय:। ज्ञानं लब्धवा परां शांतिमचिरेणाधिगच्छति।। अर्थात श्रद्धावान मनुष्य जितेंद्रिय साधक बनकर तत्वज्ञान प्राप्त करता है और तत्काल ही भगवत्प्राप्ति के रूप में परम शांति पा लेता है।

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श्रद्धा के बिना विवेकहीन व्यक्ति संशयग्रस्त होकर पथभ्रष्ट हो जाता है। गीता के अनुसार - अज्ञश्चाश्रद्धानश्च संशयात्मा विनश्यति। नायं लोकोस्ति न परो न सुखं संशयात्मन:।। अर्थात श्रद्धारहित विवेकहीन संशययुक्त मनुष्य परमार्थ से पथभ्रष्ट हो जाता है। ऐसे मनुष्य के लिए न यह लोक है, न परलोक है और न ही सुख है।

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यह सच है कि श्रद्धा की शक्ति के बिना मानव शंकाओं में भटककर विवेकहीन हो जाता है। तब वह जीवन के लक्ष्य से दूर हो जाता है। यह श्रद्धा सभी व्यक्तियों में समान रूप से नहीं हो सकती, क्योंकि यह उनके अंत:करण के अनुरूप होती है। गीता (17-2) इस बारे में प्रकाश डालती है- त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा। सात्विकी राजसी चैव तामसी चेतितां श्रृणु।। अर्थात मनुष्य के स्वभाव से उत्पन्न श्रद्धा सात्विक, राजसिक और तामसिक तीन प्रकार की होती है। कर्र्मो के संस्कार मनुष्य का स्वभाव बनाते हैं। अपने भिन्न स्वभाव के कारण मनुष्य सात्विक, राजसिक और तामसिक होता है। अर्थात श्रद्धा मनुष्य के स्वभाव के अनुरूप ही होती है।


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ऋषियों ने कहा है कि जिसकी जैसी श्रद्धा होती है, उसे उसी के अनुरूप परिणाम मिलता है। श्रद्धा ही पत्थर को शिव बना देती है। श्रद्धा भावनात्मक संबंधों की संजीवनी है।

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साईंबाबा का दूसरा उपदेश है - सबूरी यानी सब्र या संयम। आज हमारे भीतर संयम की ताकत बहुत कम हो गई है। हम अपने हर काम का परिणाम तत्काल चाहते हैं। हम अपनी हर इच्छा तुरंत पूरी होते देखना चाहते हैं। संयम खो देने पर बड़ा योगी भी पतित हो जाता है। हमें अपने मन, वचन और कर्म तीनों पर संयम का अंकुश लगाना चाहिए। गीता में संयम का पाठ पढ़ाते हुए यह संकेत दिया गया है कि इंद्रियां बड़ी चंचल हैं। इनको जीतना अत्यंत कठिन है, किंतु यह दुष्कर कार्य संयम के बल से किया जा सकता है।




हमारी अधिकांश समस्याएं संयम के अभाव से ही उत्पन्न हुई हैं। संयम खो देने पर महायोगी भी साधारण बन जाता है। संतों ने हमेशा यही शिक्षा दी है कि सब्र का फल मीठा होता है, अत: हर एक को संयमशील बनना चाहिए। संयम का कवच हमें विपत्तियों के प्रहार से बचाता है। साईं बाबा ने श्रद्धा के साथ सबूरी को जोड़कर हमें ऐसा ब्रहृामास्त्र दे दिया है, जिससे हम हर स्थिति में निपट सकते हैं। यह उपदेश मानव के लिए सफलता का वह महामंत्र है, जो हर युग में प्रासंगिक एवं जनोपयोगी बना रहेगा।


*🌹🙏🌹अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज योगिराज

परब्रह्म श्री सचिदानंद सतगुरु साईनाथ महाराज की जय 🌹🙏🌹*             *

🌹🙏🌹Anant koti Brahmaand nayak Rajadhiraj yogiraj 

Parbraham shri Sachidanand Sadguru Sainath Maharaj Ji ki Jai

*🌹🙏🌹🙏 Saidatt



साईं बाबा Status In HINDI For Whatsapp


साईं बाबा Status In HINDI For Whatsapp
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साईं नाम लेते रहो बिगड़ा काम संवर जाएगा तुमको पता भी नहीं चलेगा 

और बुरा वक्त गुजर जाएगा।

                                         अकेले चलना सिख लो जरुरी नहीं जो आज तुम्हारे साथ है 

                                                              वो कल भी तुम्हारे साथ रहे ॥


सुकून की तलाश में हम कहां कहां मगर 
                                  
                                              जो सुकून SAI तेरे दीदार में है कहीं ओर कहां भटके




SAINATHAY NAMHAA
उसकी इजाजत के बिना पुत्ता भी नहीं हिलता और ये बात इंसान समझ कर भी नहीं समझता
SAIDATT !! ॐ साई राम !!


 


जब मैं बुरे हालातों से घबराता हूँ

तभी साई की आवाज़ आती है

रुक मैं अभी आता हूँ


साईंनाथाय नमः
श्रद्धा रखना और सब्र से काम करते रहना
ईश्वर जरुर भला करेगा। साईं दत्त





एक फूल भी 
  अक्सर बाग़ सजा देता है.....
  एक सितारा
   संसार की चमका देता है....
  जहाँ दुनिया भर के रिश्ते  
   काम नहीं आते

    वहाँ मेरा साई 
    जिन्दगी सवार देता है..
*आज के श्री साई बाबा दर्शन*
       ॐ साई राम जी🙏




साईंनाथाय नमः
saidatt
ॐ साईराम
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना...




मैं अच्छे इन्सानों का इम्तिहान लेता हूँ पर साथ कभी नहीं छोड़ता




ॐ साईराम
रोज़ गलती करता हूं, तू छुपाता है अपनी बरकत से,
 मैं मजबूर अपनी आदत से, तू मशहूर अपनी रहमत से!







जिंदगी से एक ही बात सीखी है,, ईश्वर से उम्मीद लगाने वाला हर शख्स कामयाब होता है !







श्री साईनाथ महाराज आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें
श्रद्धा
सबूरी
सबका मालिक एक
अनंत कोटी ब्रम्हांडनायक राजाधिराज योगीराज
 परं ब्रम्हं श्री सच्चिदानंद सदगुरु श्री साईनाथ महाराज





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श्री कृष्णावेणी उत्सव 2023 (श्री क्षेत्र नरसोबावडी)



"मच्चिता चिंती साची तू वाडी नरसोबाची असा श्री क्षेत्र नरसोबावाडीचा अलौकिक महिमा प्रेमभराने गाणारे व श्री क्षेत्र नृसिंहवाडीचे आम्ही आहोत" असे स्वानंदाने सांगणारे श्रीमत् प. प. वासुदेवानंद सरस्वती टेंब्ये स्वामी महाराज वाडी क्षेत्री एकदा वास्तव्यास असताना आपल्या अतिशय प्रिय पुजारी वाडीकर भक्तजनांना श्रीकृष्णा-पंचगंगेच्या अनादि संगमावर श्रीकृष्णा मातेचे अगाध माहात्म्य आपल्या देववाणीतून प्रकट करीत असतानाच एक "कनकी नामक देववृक्षाचे श्रीकृष्णावेणीचे अमूर्त स्वरूप वाहत आल्याचे त्रिकाल ज्ञानी महाराजांच्या ऋतंभरा प्रज्ञेस ज्ञात झाले भावावस्था प्राप्त महाराजांनी एका भक्ताकरावी या कृष्णेच्या अमूर्त स्वरूपास आपल्याजवळ आणले. प. प. स्वामींना त्रिपुरसुंदरी श्रीकृष्णावेणी मातेने जे मनोहरी दर्शन दिले त्याप्रमाणे या 'श्रीकृष्णावेणीच्या' अमूर्त स्वरूपाला अतिशय सुंदर असे मूर्ती स्वरूप देण्यात आलेतीच ही आपली सर्वांची जीवनदायिनी श्री कृष्णावेणी माता...

श्री दत्तात्रेयांचे द्वितीय अवतार श्रीमन नृसिंहसरस्वती स्वामी महाराजांच्या बारावर्षांच्या तपःसाधनेने पावनमय झालेल्या कृष्णा-पंचगंगा संगमावरील श्री नृसिंहवाडी क्षेत्री प.प. थोरले (स्वामी (टेंब्ये स्वामी) महाराजांच्या सत्यसंकल्पाने श्रीकृष्णावेणी मातेचा उत्सव होत आहे.

श्रीकृष्ण वेणी मातेचा उत्सव वेळापत्रक खालील प्रमाणे 

|| श्री कृष्णावेणी प्रसन्न ||

स.न.वि.वि. प्रतिवर्षाप्रमाणे

श्री कृष्णावेणी उत्सव - २०२३ श्री क्षेत्र नृसिंहवाडी येथे मिती माघ शु. ७ (रथसप्तमी) शनिवार दि. २८ जानेवारी ते माघ कृ. ॥। १ सोमवार दि. ६ फेब्रुवारी २०१३ अखेर १० दिवस साजरा होणार आहे.

उत्सव प्रसंगी होणारे नित्य कार्यक्रम
सकाळी ७.०० वा.
सकाळी ८.०० वा. : ऋक्संहिता, ब्राह्मण आरण्यक्, श्री गुरुचरित्र, कृष्णा माहात्म्य,

श्रीमद् भागवत, श्रीसूक्त, रुद्रैकादशिनी, सप्तशती इ. पारायणे आरती
दुपारी १:०० वा.
: श्री. एकवीरा भगिनी मंडळ, श्री क्षेत्र नृसिंहवाडी यांचे
दुपारी ३:०० ते ४:००
"श्री कृष्णालहरी पठण
सायं. ४.०० ते ५.०० वा.
: वे. मू. श्री. हरी नारायण पुजारी (चोपदार), नृसिंहवाडी यांचे 'श्री कृष्णालहरी पुराण" 
रात्री ८.०० वा.पूजा
 अर्चा : आरती व मंत्रपुष्प

विशेष कार्यक्रम

शनिवार, दि. २८ जानेवारी २०२३
सायं. ५ वा.
श्री. प्रसाद शेवडे, देवगड यांचे 'गायन'
रात्री ९:३० वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन'

रविवार, दि. २९ जानेवारी २०२३
सायं. ५ वा. श्री. भाग्येश मराठे, मुंबई यांचे 'गायन'
रात्रौ. ९:३० वा. ह.भ.प.श्री.नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन'

सोमवार, दि. ३० जानेवारी २०२३
सायं. ५ वा.
सौ. मृणाल नाटेकर - भिडे, मुंबई यांचे 'गायन' रात्री ९:३० वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन'

मंगळवार, दि. ३१ जानेवारी २०२३
श्री. सुभाष परवार, गोवा यांचे 'गायन'
सायं. ५ वा. रात्रौ ९:३० वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन'

बुधवार, दि. १ फेब्रुवारी २०२३
सकाळी 8 वा. " श्री विष्णुयाग"
सायं. ५ वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन'
रात्रौ ८ वा. " मंत्रजागर " रात्री ९:३० वा. " गर्जली स्वातंत्र्य शाहिरी " सादरकर्ते आचार्य शाहीर हेमंतराजे पु. मावळे आणि सहकारी, (नानिवडेकर- हिंगे मावळे शाहिरी घराण्याचे उत्तराधिकारी) पुणे

गुरुवार, दि. २ फेब्रुवारी २०२३
सायं. ५ वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन रात्रौ ९:३० वा. पं. श्री. शौनक जितेंद्र अभिषेकी, पुणे यांचे 'गायन'

शुक्रवार, दि. ३ फेब्रुवारी २०२३
सायं. ५ वा.
ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन' रात्रौ ९:३० वा. 'नाम घेऊ नाम गाऊ' भक्तिगीत गायन संकल्पना संगीत दिग्दर्शन- प्रस्तुती श्री. प्रदीप धोंड - पिंगुळी, कुडाळ. (मुंबई)

शनिवार, दि. ४ फेब्रुवारी २०२३
सायं. ५ वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे सुश्राव्य कीर्तन रात्री ९:३० वा. पं. श्री. रघुनंदन पणशीकर, पुणे यांचे 'गायन'

रविवार, दि. ५ फेब्रुवारी २०२३
सायं. ५ वा. ह. भ. प. श्री. नंदकुमारबुवा कर्वे, पनवेल यांचे 'सुश्राव्य कीर्तन'
रात्रौ ८ वा. श्रीमद् जगदुरु शंकराचार्य, करवीर पीठ यांचे आशीर्वचन " रात्री ९:३० वा. कु. मृदुला तांबे, पुणे यांचे 'गायन'






सोमवार, दि. ६ फेब्रुवारी २०२३
सायं. ५ वा. श्री. अतुल खांडेकर, पुणे यांचे 'गायन' 
रात्री ९:३० वा. ह. भ. प. श्री. शरद दत्तदासबुवा घाग, नृसिंहवाडी यांचे सुश्राव्य कीर्तन'












भगवान विष्णु का स्वप्न 1

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भगवान विष्णु का स्वप्न
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एक बार भगवान नारायण अपने वैकुंठलोक में सोये हुए थे। स्वप्न में वे क्या देखते हैं कि करोड़ों चंद्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरूधारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेंद्र वंदित, अणिमादि सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान शिव प्रेम और आनंदातिरेक से उन्मत्त होकर उनके सामने नृत्य कर रहे हैं। 


शिव प्रेम नृत्य कर रहे हैं।




उन्हें देखकर भगवान विष्णु हर्ष-गद्गद हो सहसा शय्या पर उठकर बैठा गए और कुछ देर तक ध्यानस्थ बैठे रहे। उन्हें इस प्रकार बैठे देखकर श्रीलक्ष्मीजी उनसे पूछने लगीं कि ‘भगवन्! आपके इस प्रकार उठ बैठने का क्या कारण है?’ भगवान ने कुछ देर तक उनके इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया और आनंद में निमग्न हुए चुपचाप बैठे रहे। अंत में कुछ स्वस्थ होने पर वे गद्गद-कंठ से इस प्रकार बोले - ‘हे देवि! मैंने अभी स्वप्न में भगवान श्रीमहेश्वर का दर्शन किया है, उनकी छबि ऐसी अपूर्व आनंदमय एवं मनोहर थी कि देखते ही बनती थी।


 मालूम होता है, शंकर ने मुझे स्मरण किया है। अहोभाग्य्! चलो, कैलास में चलकर हम लोग महादेव के दर्शन करें।’



यह कहकर दोनों कैलास की ओर चल दिये। मुश्किल से आधी दूर गये होंगे कि देखते हैं भगरान शंकर स्वयं गिरिजा के साथ उनकी ओर चले आ रहे हैं। अब भगवान के आनंद का क्या ठिकाना? मानो घर बैठे निधि मिल गयी।पास आते ही दोनों परस्पर बड़े प्रेम से मिले। मानो प्रेम और आनंद का समुद्र उमड़ पड़ा। एक दूसरे को देखकर दोनों के नेत्रों से आनंदाश्रु बहने लगे और शरीर पुलकायमान हो गया। दोनों ही एक दूसरे से लिपटे हुए कुछ देर मूकवत् खड़े रहे।



 प्रश्नोत्तर होने पर मालूम हुआ कि शंकरजी को भी रात्रि में इसी प्रकार का स्वप्न हुआ कि मानो विष्णु भगवान को वे उसी रूप में देख रहे हैं, जिस रूप में वे अब उनके सामने खड़े थे। दोनों के स्वप्न का वृत्तांत अवगत होने पर दोनों ही लगे एक दूसरे से अपने यहां लिवा जाने का आग्रह करने। नारायण कहते वैकुंठ चलो और शंभु कहते कैलास की ओर प्रस्थान कीजिए। दोनों के आग्रह में इतना अलौकिक प्रेम था कि निर्णय करना कठिन हो गया कि कहां चला जाय। इतने में ही क्या देखते हैं कि वीणा बजाते, हरिगुण गाते नारदजी कहीं से आ निकले। बस, फिर क्या था? लगे दोनों ही उनसे निर्णय कराने कि कहां चला जाय? बेचारे नारदजी तो स्वयं परेशान थे उस अलौकिक मिलन को देखकर ।


वे तो स्वयं अपनी सुध-बुध भूल गए और लगे मस्त होकर दोनों का गुणगान करने। अब निर्णय कौन करे? अंत में यह तय हुआ कि भगवती उमा जो कह दें वही ठीक है। भगवती उमा पहले तो कुछ देर चुप रहीं। अंत में वे दोनों को लक्ष्य करके बोलीं - ‘हे नाथ! हे नारायण! आप लोगों के निश्चल, अनन्य एवं अलौकिक प्रेम को देखकर तो यही समझ में आता है कि आपके निवास-स्थान अलग-अलग नहीं हैं, जो कैलास है वही वैकुण्ठ है और जो वैकुण्ठ है वही कैलास है, केवल नाम में ही भेद है। यही नहीं, मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि आपकी आत्मा भी एक ही है, केवल शरीर देखने में दो हैं। और तो और मुझे तो अब यह स्पष्ट दीखने लगा है कि आपकी भार्याएं भी एक ही हैं, दो नहीं। 



जो मैं हूं वही श्रीलक्ष्मी हैं और जो श्रीलक्ष्मी हैं वही मैं हूं। केवल इतना ही नहीं, मेरी तो अब यह दृढ़ धारणा हो गई है कि आप लोगों में से एक के प्रति जो द्वेष करता है, वह मानो दूसरे के प्रति ही करता है, एक की जो पूजा करता है, वह स्वभाविक ही दूसरे की भी करता है और जो एक को अपूज्य मानता है, वह दूसरे की भी पूजा नहीं करता। मैं तो यह समझती हूं कि आप दोनों में जो भेद मानता है, उसका चिरकाल तक घोर पतन होता है। 


मैं देखती कि आप मुझे इस प्रसंग में अपना मध्यस्थ बनाकर मानो मेरी प्रवंचना कर रहे हैं, मुझे चक्कर में डाल रहे हैं, मुझे भुला रहे हैं। अब मेरी यह प्रार्थना है कि आप लोग दोनों ही अपने-अपने लोक को पधारिए। श्रीविष्णु यह समझें कि हम शिवरूप से वैकुण्ठ जा रहे हैं और महेश्वर यह मानें कि हम विष्णुरूप से कैलास गमन कर रहे हैं।’

इस उत्तर को सुनकर दोनों परम प्रसन्न हुए और भगवती उमा की प्रशंसा करते हुए दोनों प्रणामालिंगन के अनंतर हर्षित हो अपने-अपने लोक को चले गए।

लौटकर जब श्रीविष्णु वैकुण्ठ पहुंचे तो श्रीलक्ष्मी जी उनसे पूछने लगीं कि ‘प्रभो! सबसे अधिक प्रिय आपको कौन हैं?’ इस पर भगवान बोले - ‘प्रिये! मेरे प्रियतम केवल श्रीशंकर हैं। देहधारियों को अपने देह की भांति वे मुझे अकारण ही प्रिय हैं। एक बार मैं और शंकर दोनों ही पृथ्वी पर घूमने निकले। मैं अपने प्रियतम की खोज में इस आशय से निकला कि मेरी ही तरह जो अपने प्रियतम की खोज में देश-देशांतर में भटक रहा होगा, वही मुझे अकारण प्रिय होगा। थोड़ी देर के बाद मेरी श्रीशंकरजी से भेंट जो गयी। ज्यों ही हम लोगों की चार आंखें हुईं कि हम लोग पूर्वजन्मार्जित विज्ञा की भांति एक्-दूसरे के प्रति आकृष्ट हो गए। ‘वास्तव में मैं ही जनार्दन हूं और मैं ही महादेव हूं। अलग-अलग दो घड़ों में रखे हुए जल की भांति मुझमें और उनमें कोई अंतर नहीं है। शंकरजी के अतिरिक्त शिव की अर्चा करने वाला शिवभक्त भी मुझे अत्यंत प्रिय है। इसके विपरीत जो शिव की पूजा नहीं करते, वे मुझे कदापि प्रिय नहीं हो सकते।





कर्क राशि वार्षिक राशिफल 2023 (Cancer Yearly Horoscope 2023)



कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार कर्क राशि के जातकों के जीवन में वर्ष 2023 एक बड़ा ही महत्वपूर्ण वर्ष साबित होगा क्योंकि जहां अष्टम भाव में शनि का प्रभाव आपकी मानसिक स्थिति को बिगाड़ सकता है और आपके जीवन में मानसिक तनाव दे सकता है, तो वहीं आपके करियर को कुछ अच्छे तरीके से प्रभावित भी कर सकता है। देव गुरु बृहस्पति की कृपा भाग्य को प्रबल बना सकती है जिसकी वजह से आपको अपने जीवन में अनेक क्षेत्रों में अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। विशेष रूप से जनवरी से अप्रैल के बीच जब बृहस्पति नवम भाव में रहेंगे और आपकी राशि पर पूर्ण दृष्टि डालेंगे तो आपको अच्छी सोच और अच्छे निर्णय लेने का बड़ा शानदार अवसर मिलेगा और उनकी वजह से आप जीवन में कुछ अच्छा प्राप्त कर पाएंगे। यदि आप मानसिक तनाव से बच पाए तो इस वर्ष काफी तरक्की कर पाएंगे। राहु दशम भाव में बैठकर आपको युक्तियुक्त बनाएगा। आप मुश्किल से मुश्किल काम को भी अपनी कोई युक्ति लगाकर बड़ी आसानी से निपटा लेंगे और इससे आपको अपने कार्यक्षेत्र में अपना काम समय से पूरा करने में आसानी होगी।

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कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार वर्ष की शुरुआत में आपको अपने स्वास्थ्य का थोड़ा ध्यान रखना होगा क्योंकि शनि महाराज का गोचर सप्तम भाव से निकलकर अष्टम भाव में आएगा जो कि आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है लेकिन इसी दौरान बृहस्पति के नवम भाव में होने से आपका मन धार्मिक गतिविधियों में अधिक लगेगा। आप तीर्थाटन करेंगे और अनेक धार्मिक जगहों पर दर्शन करने के लिए भी जा सकते हैं। जब तक देव गुरु बृहस्पति आपके नवम भाव में रहेंगे। आपके किसी भी काम को रुकने नहीं देंगे और आप मनचाहा परिणाम प्राप्त कर पाएंगे। थोड़ी सी मेहनत से भी आपको अच्छे परिणाम मिलने लगेंगे। हालांकि शनि महाराज की वजह से मानसिक तनाव बराबर बना रहेगा लेकिन आप उससे बाहर निकलने का रास्ता भी देव गुरु बृहस्पति की कृपा से खोज ही लेंगे और जैसे ही आप ऐसा करेंगे, आपको अपने जीवन में आ रही मुसीबतों से छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि शनि अष्टम भाव में रहेंगे इसलिए किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज करने से आपको बचना चाहिए, अन्यथा यह एक विकट परिस्थिति को जन्म दे सकती है और कोई बड़ी बीमारी आपको पीड़ित कर सकती है।

वर्ष 2023 की पहली तिमाही आपको सामान्य से कुछ बेहतर परिणाम प्रदान करेगी। कार्यों में विघ्न नहीं आएंगे और आपकी रुकी हुई योजनाएं भी पूर्ण होने लगेगी जिसकी वजह से आप आर्थिक रूप से अच्छा महसूस कर पाएंगे। आपकी आर्थिक योजनाएं सफल रहेंगी और दीर्घकालीन निवेश की योजनाएं भी आप इस दौरान बना सकते हैं लेकिन स्वास्थ्य को लेकर आपको सावधान रहने की आवश्यकता होगी।


कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार वर्ष के शुरुआती महीनों जनवरी से लेकर अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक भाग्य आपके साथ पल प्रतिपल खड़ा नजर आएगा। आप जिस भी काम को करने की सोचेंगे, उसमें आपको सफलता मिल सकती है। ईश्वर की कृपा आपके साथ रहेगी। आपके गुरु और गुरु समान लोगों तथा आपके पिता का सहयोग आपके साथ रहेगा जिससे आपको अपने काम-धंधे में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। नौकरी में भी परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी और संभव है कि आपका किसी अच्छी जगह तबादला हो जाए जहां जाने की आप लंबे समय से उम्मीद कर रहे थे।


इस वर्ष की पहली तिमाही में परिवार में जो तनाव चला आ रहा था, उसमें कुछ कमी आएगी लेकिन आपका अपने ससुराल पक्ष के लोगों से कोई विवाद न हो जाए, इसका आपको ध्यान रखना पड़ेगा क्योंकि इसका प्रभाव आपके निजी जीवन पर भी आएगा। राहु और केतु क्रमश: आपके दशम और चतुर्थ भाव में पहली तिमाही में रहेंगे जो कि आपके पारिवारिक जीवन में थोड़ा तनाव बढ़ा सकते हैं। अष्टम भाव में बैठकर शनि महाराज भी दूसरे भाव को देखेंगे और पंचम भाव पर दृष्टि डालेंगे जिसकी वजह से कुटुंब के लोगों में परस्पर सामंजस्य की कमी रहेगी और हो सकता है कि किसी बात को लेकर वाद-विवाद जन्म ले। बृहस्पति महाराज आपको सही निर्णय लेने वाला और सही सोच का व्यक्ति बनाएंगे इसलिए आप भाग्य की कृपा से इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकलने में कामयाब हो सकते हैं।


कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार दूसरी और तीसरी तिमाही आपके लिए कुछ उतार-चढ़ाव से भरी रहने वाली है। बृहस्पति और राहु का दशम भाव में गुरु चांडाल दोष निर्मित करना करियर में उथल-पुथल का संकेत देता है। इस दौरान हो सकता है कि आप अपनी वर्तमान नौकरी को छोड़कर अन्य नौकरी करने लगें, जहां शुरुआत में आपको कुछ दबाव का सामना करना पड़े क्योंकि आपके ऊपर काम का बोझ थोड़ा सा अधिक हो सकता है। इसी समय में पारिवारिक जीवन में थोड़ा तनाव रह सकता है और पहले से रुके हुए मुद्दे भी इस दौरान बाहर निकल कर आ सकते हैं। हालांकि शनि महाराज की दशम भाव पर दृष्टि आपको ऊर्जावान और आशावान बनाएगी और आप कठिन चुनौतियों से बाहर निकलने की पूरी कोशिश करते हुए सफल भी होंगे।


वर्ष की अंतिम तिमाही के दौरान आपकी लंबी यात्राओं के योग बनेंगे। सुदूर यात्रा करने से आपका मन भी प्रसन्नचित रहेगा और आप अपने कामों को और भी बेहतर तरीके से पूर्ण कर पाएंगे। दूर की यात्राओं से आपको लाभ भी होगा और आपके कुछ बड़े संपर्क भी स्थापित होंगे। आपको पवित्र नदियों में स्नान करने का मौका भी मिलेगा। आप चुनौतियों का डटकर सामना करेंगे और इसी वजह से जो चली आ रही समस्याएं हैं, उन्हें दूर कर पाएंगे। बृहस्पति महाराज की दूसरे और चौथे भाव पर दृष्टि आपके पारिवारिक जीवन में भी सुख शांति लेकर आएगी।


जनवरी का महीना उथल-पुथल से भरा रहेगा। दांपत्य जीवन में जो तनाव चला आ रहा है, उसमें शनि के गोचर के बाद कुछ कमी आने लगेगी। भाग्य का साथ मिलेगा जिससे व्यवसाय और नौकरी में अच्छे परिणाम मिलेंगे। आर्थिक स्थिति इस दौरान बढ़िया रहेगी क्योंकि मंगल आपके एकादश भाव में रहेंगे। फरवरी के महीने में आर्थिक चुनौतियों में कमी आएगी। दांपत्य जीवन में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि इसी समय में प्रेम जीवन में कुछ तनाव और चुनौतियां बनी रह सकती हैं। संतान पक्ष को लेकर भी कोई समस्या महसूस हो सकती है। पारिवारिक माहौल ज्यादा अनुकूल नहीं नजर आ रहा है।


अप्रैल के महीने में देव गुरु बृहस्पति आपके भाग्य के सहारे आपका कहीं ट्रांसफर करा सकते हैं। उसके बाद जब गुरु का गोचर आपके दशम भाव में होगा तो कार्यक्षेत्र में अदला-बदली की संभावना बन सकती है। आप इस दौरान कोई नई नौकरी प्राप्त कर सकते हैं जिसमें आपको अपनी काबिलियत दिखाने का पूरा मौका मिलेगा। हल्का सा मानसिक और काम का दबाव आपके ऊपर जरूर होगा लेकिन आप उससे बहुत बढ़िया तरीके से बाहर निकल आएंगे। मई के महीने में मंगल का गोचर आपकी ही राशि में होने से आप थोड़े गर्म मिजाज हो जाएंगे। इसका असर दांपत्य जीवन और निजी जीवन में तनाव बढ़ा सकता है इसलिए इन समय में किसी भी तरह के वाद विवाद से बचना ही बेहतर होगा। हालांकि इसी समय में आपको कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने का लाभ भी मिल सकता है।


जून के महीने में आपके विदेश जाने के योग बन सकते हैं। खर्चों में थोड़ी तेजी बनी रहेगी और दांपत्य जीवन में कुछ समस्याएं रहेंगी लेकिन व्यापार अच्छी तेजी से आगे बढ़ेगा जिससे आप राहत महसूस कर सकते हैं। संतान को लेकर आपकी परेशानियां दूर हो जाएंगी।


कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार जुलाई के महीने में आर्थिक समृद्धि आएगी। आप अपना बैंक-बैलेंस बढ़ाने में कामयाब रहेंगे। कुछ अच्छी योजनाओं का आपको लाभ मिलेगा। इस दौरान भी आप अहम भावना से ग्रसित हो सकते हैं और उसी की वजह से आपके दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ सकता है।


अगस्त और सितंबर का महीने आपको मेहनती और रिस्क लेने वाला बनाएगा। आप चुनौतियों का डटकर सामना करेंगे। आपके साहस और पराक्रम में बढ़ोतरी होगी। भाई बहनों को कोई समस्या हो सकती है लेकिन उनका सहयोग और समर्थन आपके साथ रहेगा। आपको साथ काम करने वाले लोगों से थोड़ा सावधान रहना होगा क्योंकि वह आपके विरुद्ध कोई गलत कदम उठा सकते हैं।


कर्क राशिफल 2023 यह संकेत देता है कि अक्टूबर के महीने में कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने में सफलता प्राप्त हो सकती है। इस दौरान आप कोई बड़ी गाड़ी भी खरीद सकते हैं जो काफी मजबूत होगी और देखने में भी अच्छी होगी। हालांकि इसी दौरान आपकी माता जी के स्वास्थ्य में कुछ गिरावट आ सकती है इसलिए आपको उनकी सेहत का ध्यान रखना होगा।


नवंबर के महीने में प्रेम जीवन में अच्छे संकेत मिलेंगे। आप अपने प्रियतम के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं और राहु के आपके नवम भाव में आ जाने से कार्यक्षेत्र में चली आ रही चुनौतियां भी कम होने लगेगी और आपको अच्छे आर्थिक लाभ प्राप्त होने लगेंगे।


दिसंबर का महीना भी अनुकूल ही रहने की संभावना है। इस दौरान आप अपने कार्यक्षेत्र में अच्छी स्थिति कायम रख पाएंगे। दांपत्य जीवन में भी तनाव में कमी आएगी। पूर्व में किए गए निवेश का लाभ मिलेगा और आपकी कार्यकुशलता आपके लिए बहुत काम करती नजर आएंगी।


कर्क प्रेम राशिफल 2023

कर्क प्रेम राशिफल 2023 के अनुसार, वर्ष 2023 में कर्क राशि के लोगों के प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी। वर्ष की शुरुआत में मंगल की दृष्टि पंचम भाव पर होने से तनाव और टकराव की स्थिति बन सकती है लेकिन बृहस्पति महाराज की कृपा दृष्टि आपके रिश्ते को बचाए रखेगी। अप्रैल तक कई परेशानियों के बावजूद आप अपने रिश्ते को संभाले रखने में कामयाब रहेंगे। मई के महीने में रिश्ते में तनाव बढ़ेगा और आपके काम का प्रभाव आपके प्रेम संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है। उसके बाद आप अपने रिश्ते में काफी अनुकूलता और सहजता महसूस करेंगे। जून के महीने में आपके रिश्ते में अंतरंग संबंधों की बढ़ोतरी होगी और आप अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का विचार करेंगे और विवाह के संबंध में विचार बना सकते हैं। वर्ष का अंतिम महीना आपके रिश्ते में रोमांस बढ़ाएगा और आप अपने प्रियतम के साथ खुशी भरे पल का लुत्फ उठाएंगे।


कर्क करियर राशिफल 2023

वैदिक ज्योतिष पर आधारित कर्क 2023 करियर राशिफल के अनुसार, इस वर्ष कर्क राशि के जातकों को वर्ष की शुरुआत में कुछ अच्छे बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। शनि महाराज 17 जनवरी को आपके अष्टम भाव में प्रवेश करेंगे जिससे मानसिक तनाव के बावजूद आप अपने कार्य और व्यवसाय में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। आपकी अपने कार्यक्षेत्र में काम में रुचि बढ़ेगी और बृहस्पति महाराज की कृपा से आपका भाग्य भी आपका साथ देता नजर आएगा। 22 अप्रैल को देव गुरु बृहस्पति आपके दशम भाव में प्रवेश करेंगे और वहां से आपके छठे भाव को भी देखेंगे। यह समय नौकरी में परिवर्तन और उसी के साथ तनख्वाह में वृद्धि का संकेत भी देता है लेकिन मई के महीने में राहु का विशेष चांडाल दोष का प्रभाव दिखाई देगा जो आपको थोड़ा परेशान कर सकता है। इस दौरान आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा। कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह के वाद-विवाद से दूर रहना होगा। कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार 30 अक्टूबर को जब राहु महाराज आपके नवम भाव में आ जाएंगे तो आपके कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। आपका तबादला हो सकता है लेकिन वह आपके हित में रहेगा और आपको अपने करियर में अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। आपकी उन्नति होगी और वर्ष के अंतिम महीनों के दौरान आप अपने काम में ऊंचाई प्राप्त कर पाएंगे।


कर्क शिक्षा राशिफल 2023

कर्क शिक्षा राशिफल 2023 के अनुसार यह वर्ष कर्क राशि के विद्यार्थियों के लिए मिश्रित परिणाम देने वाला वर्ष रहने वाला है। वर्ष की शुरुआत में मंगल का प्रभाव आपके पंचम भाव पर रहेगा और बृहस्पति महाराज भी पंचम भाव को देखेंगे जिसकी वजह से आप पढ़ाई को लेकर काफी उत्साहित नजर आएंगे। आपकी एकाग्रता भी अच्छी रहेगी लेकिन 17 जनवरी से शनि देव का गोचर और शनि की आपके पंचम भाव पर दृष्टि पढ़ाई में कोई ना कोई व्यवधान उत्पन्न करती रहेगी इसलिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता होगी। यदि आप अपने अंतिम वर्षों में है तो आपका कैंपस इंटरव्यू में चयन हो सकता है और आपको अच्छा पैकेज भी मिल सकता है। वर्ष का पूर्वार्ध उच्च शिक्षा के लिए अत्यंत अनुकूल रहने की संभावना है। इस दौरान किए गए प्रयास सफलता लेकर आएंगे और आपको अपने मनपसंद विषय पढ़ने का और मनपसंद पाठ्यक्रम में दाखिला प्राप्त होने का शुभ अवसर प्राप्त हो सकता है। यदि आप विदेश जाकर पढ़ाई का सपना देख रहे हैं तो आप की यह इच्छा मार्च से जून के बीच पूरी हो सकती है, जब आपको विदेश जाकर पढ़ने का मौका मिलेगा।


कर्क वित्त राशिफल 2023

कर्क वित्तीय राशिफल 2023 के अनुसार कर्क राशि के जातकों के लिए यह वर्ष आर्थिक तौर पर मिश्रित परिणाम लेकर आएगा लेकिन आपको कई बार अच्छे परिणाम भी प्राप्त होंगे। वर्ष की शुरुआत में मंगल आपके एकादश भाव में वक्री अवस्था में रहेंगे और आपकी आमदनी में बढ़ोतरी करते रहेंगे। बृहस्पति महाराज भी भाग्य का साथ देंगे जिससे आप जिस किसी काम को करने की कोशिश करेंगे, उसमें सफलता मिलेगी और आपकी आर्थिक स्थिति में बढ़ोतरी होगी। अप्रैल तक भाग्य का साथ मिलने से आर्थिक स्थिति भी बढ़िया रहेगी। अप्रैल के महीने में सूर्य महाराज भी आपके एकादश भाव में रहकर आपकी आमदनी में वृद्धि के संकेत देते हैं। शनिदेव महाराज वर्ष पर्यंत आपके अष्टम भाव में बने रहेंगे इसलिए आपको कोई बड़ा निवेश सोच समझकर करना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि आपका पैसा डूब जाए। मई से जुलाई के बीच थोड़ा तनाव बढ़ सकता है। धन को लेकर कुछ चिंताएं रहेंगी। हालांकि अगस्त के महीने में सूर्य आपके दूसरे भाव में गोचर करेंगे और आपके बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी करते हुए नजर आएंगे। सितंबर और अक्टूबर के बीच आपको थोड़ा सोच-समझकर चलना होगा क्योंकि इस दौरान आर्थिक रूप से कुछ चुनौतियां आपके सामने आएंगी। कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार पारिवारिक खर्चों के भी योग बनेंगे जो आपकी आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करेंगे। नवंबर और दिसंबर के महीने में घर में कोई आवश्यक वस्तु खरीदने से बड़ा खर्चा होगा लेकिन दिसंबर में आपकी आमदनी में अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है।


कर्क पारिवारिक राशिफल 2023

कर्क पारिवारिक राशिफल 2023 के अनुसार कर्क राशि के जातकों के लिए उतार चढ़ाव से भरा वर्ष रहने वाला है। जनवरी से लेकर अप्रैल तक आपको अपने पारिवारिक जीवन में तनाव का सामना करना पड़ सकता है। राहु और केतु का प्रभाव चौथे और दसवें भाव पर रहेगा और शनि अष्टम भाव में बैठकर आपके दूसरे और पंचम भाव पर प्रभाव डालेंगे। जनवरी में मंगल भी आपके दूसरे और पांचवें भाव को देखेंगे इसलिए वर्ष के शुरुआती महीनों में पारिवारिक जीवन में तनाव देखने को मिलेगा और इससे आपका मन थोड़ा व्यथित होगा। मई के महीने में गुरु और राहु का चांडाल दोष निर्मित होगा जिसका प्रभाव आपके पारिवारिक जीवन को भी प्रभावित करेगा और पिताजी की सेहत में गिरावट हो सकती है और परिवार का माहौल कुछ बिगड़ सकता है लेकिन अक्टूबर के बाद से आपका पारिवारिक जीवन बहुत ही खुशहाल रहेगा। पारिवारिक सदस्यों को एक दूसरे से सामंजस्य बिठाने में कोई समस्या नहीं आएगी लेकिन इसी अक्टूबर के महीने में माता जी की सेहत बिगड़ सकती है। यदि उनका ठीक से ध्यान रखेंगे तो नवंबर तक सेहत में सुधार हो जाएगा। उसके बाद नवंबर और दिसंबर के महीने अच्छे व्यतीत होंगे।

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कर्क संतान राशिफल 2023

आपके बच्चों के लिए, वर्ष की शुरुआत कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार अच्छी रहेगी क्योंकि पंचम भाव पर मंगल की दृष्टि होगी जो कि उनकी अपनी राशि है और बृहस्पति महाराज भी अपने नवम दृष्टि से पंचम भाव को देखेंगे। यह दोनों ही स्थितियां आपके बच्चों को प्रगति देगी। उनके अंदर उत्साह का संचार करेंगी और किसी भी काम को करने में मददगार बनेंगी। हालांकि इसी बीच जब शनि अष्टम भाव में गोचर करते हुए आपके पंचम भाव को देखेंगे तो आपको अपनी संतान के स्वास्थ्य को लेकर लगभग वर्ष भर चिंता बनी रह सकती है, फिर भी ग्रहों की स्थिति आपके संतान को इस वर्ष कोई अच्छी उपलब्धि प्रदान कर सकती है क्योंकि बृहस्पति का प्रभाव अच्छा रहेगा। अक्टूबर के बाद से संतान से संबंधित और भी अच्छे परिणाम मिलेंगे और उनको तरक्की करता हुआ देखकर आपको भी गर्व महसूस होगा।।

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कर्क विवाह राशिफल 2023

कर्क विवाह राशिफल 2023 के अनुसार वर्ष 2023 में वैवाहिक जीवन को लेकर वर्ष की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रहेगी। शनि वर्ष की शुरुआत में आपके सप्तम भाव में शुक्र के साथ रहेंगे जिससे आपके रिश्ते में रोमांस तो रहेगा लेकिन आपसी तनाव बना रहेगा। उसके बाद शनि 17 जनवरी को आपके अष्टम भाव में चले जाएंगे और वहां से आपके दूसरे भाव को देखेंगे यह समय आपके दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ा सकता है। ससुराल पक्ष से भी संबंध में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी। केवल बृहस्पति महाराज की कृपा आपको थोड़ी बहुत चुनौतियों से बचाए रखेगी। उसके बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगेंगी लेकिन मई से जुलाई के बीच जब मंगल का गोचर आपकी राशि में होगा तो वह समय दांपत्य जीवन में और ज्यादा तनाव को बढ़ाने वाला साबित होगा। उसके बाद अगस्त के महीने में सूर्य भी आपके प्रथम भाव में गोचर करके सप्तम भाव को देखेंगे। वह समय अहम के टकराव का समय हो सकता है तथा आपके और जीवनसाथी के बीच टकराव हो सकता है। राहु-केतु के प्रभाव से पारिवारिक जीवन में पहले से ही तनाव चल रहा होगा। इसकी वजह से यह समय थोड़ा सा ज्यादा ध्यान देने का होगा। इसके बाद मंगल के चौथे भाव में होने से भी कुछ समस्याएं सामने आएंगी। उसके पश्चात 30 अक्टूबर के बाद जब राहु आपके नवम भाव में और केतु तीसरे भाव में आ जाएंगे तो इन चुनौतियों में थोड़ी सी कमी आएगी और वर्ष के अंत तक आप अपने दांपत्य जीवन का लुत्फ़ उठाएंगे और जीवनसाथी के साथ किसी दर्शनीय स्थल की यात्रा पर जा सकते हैं।

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कर्क व्यापार राशिफल 2023

कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार व्यापार जगत से जुड़े लोगों के लिए यह वर्ष उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। वर्ष की शुरुआत में शनि सप्तम और राहु महाराज दशम भाव में होंगे जिसकी वजह से व्यापार में उतार-चढ़ाव के योग बनेंगे। उसके बाद सप्तम भाव के स्वामी शनि अष्टम भाव में पूरे वर्ष बने रहेंगे जिससे व्यापार धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। आपके व्यापार की गति थोड़ी धीमी जरूर रहेगी लेकिन वह निरंतर प्रगति करता रहेगा। इस वर्ष विशेष रूप से अक्टूबर से दिसंबर के बीच आपके व्यापार में अच्छी उन्नति देखने को मिलेगी और पूर्व में चली आ रही समस्याओं में कमी आएगी। उससे पूर्व अप्रैल से अगस्त के बीच व्यावसायिक जीवन में कुछ तनाव आ सकता है। कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार आपको कुछ ऐसी योजनाओं पर काम करना होगा जो आपको पसंद नहीं होंगी और व्यापार को उन्हीं के अनुसार करना आपकी मजबूरी होगी क्योंकि सरकार की ओर से ऐसा करना आपके लिए जरूरी हो सकता है। इस दौरान आपको कुछ सरकारी नियमों का पालन करना बहुत ज्यादा जरूरी महसूस होगा और आपके ऊपर उसका दबाव रहेगा। हालांकि इसके बाद स्थितियां सुधरेगी और आप धीरे-धीरे अपने व्यापार को विस्तार देने में कामयाब हो पाएंगे। इस वर्ष के बीच जुलाई और नवंबर में कोई खास अवसर आपको प्राप्त हो सकता है तथा अक्टूबर से दिसंबर के बीच लंबी यात्राओं के दौरान भी आपके कुछ संपर्क बनेंगे। व्यापार के सिलसिले में की यात्राएं शुभ परिणाम प्रदान करेंगी।

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कर्क संपत्ति और वाहन राशिफल 2023

कर्क राशि वाहन भविष्यवाणी 2023 के अनुसार, यह वर्ष संपत्ति के दृष्टिकोण से मध्यम रहेगा। इस वर्ष ,जब तक राहु-केतु का प्रभाव आपके चतुर्थ भाव में है किसी भी तरह की बड़ी गाड़ी खरीदने से आपको बचना चाहिए क्योंकि वह आपके लिए ज्यादा फलीभूत नहीं होगी। 30 अक्टूबर के बाद जब राहु-केतु यह राशि छोड़ देंगे और आपके तीसरे और नवम भाव में आ जाएंगे तो आपके भी वाहन खरीदने के सुंदर योग बनेंगे। 30 नवंबर से 25 दिसंबर के बीच जब शुक्र महाराज आपके चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे तो वह समय वाहन और संपत्ति के लिए सबसे उत्तम समय होगा और इस दौरान आपको किसी बड़ी चल अथवा अचल संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है। इसके अतिरिक्त इस वर्ष मई के महीने में आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने में कामयाब हो सकते हैं।

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कर्क धन और लाभ राशिफल 2023

कर्क राशि वालों के लिए यदि वर्ष 2023 के दौरान धन और लाभ की स्थिति देखी जाए तो संकलित रूप से यह वर्ष आपके लिए अनुकूल ही रहेगा लेकिन अष्टम भाव में शनि महाराज की उपस्थिति होने से कुछ खर्चे भी बराबर लगे रहेंगे। दीर्घकालीन निवेश से आपको धन लाभ के योग बनेंगे और आपकी आर्थिक योजनाएं सफलता प्राप्त करेंगी। बृहस्पति महाराज भाग्य स्थान को प्रभावित करते हुए आपके भाग्य को प्रबल बनाएंगे जिससे धन और लाभ के मामलों में आपको सफलता मिलेगी। विशेष रूप से जनवरी से अप्रैल तक का समय आपको लाभ प्रदान करेगा। अप्रैल और मई के महीनों में सरकारी क्षेत्र से लाभ के योग बनेंगे और अगस्त के महीने में आप पैतृक संपत्ति का लाभ उठा सकते हैं तथा बैंक-बैलेंस में बढ़ोतरी कर पाएंगे। उसके बाद सितंबर का महीना आपको अपने निजी प्रयासों से धन लाभ कराएगा। इस दौरान सरकारी क्षेत्र से भी आपको फायदा पहुंच सकता है। कर्क राशिफल 2023 (Kark Rashifal 2023) के अनुसार उपरोक्त सभी के अतिरिक्त जो महीने होंगे, उनमें कुछ ना कुछ उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना रहेगी। हालांकि वर्ष के अंत तक आपके पास अच्छी मात्रा में धन की उपलब्धता रहेगी।

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कर्क स्वास्थ्य राशिफल 2023

कर्क स्वास्थ्य राशिफल 2023 के अनुसार स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखें तो वर्ष की शुरुआत कुछ कमजोर रहेगी। शनि महाराज आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर करेंगे और 17 जनवरी से उनका अष्टम भाव में जाना किसी दीर्घकालीन समस्या को जन्म देने का योग बना सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपको लगातार अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा और नियमित अंतराल पर मेडिकल चेकअप कराते रहना होगा ताकि आप अपने स्वास्थ्य को पूरी तरह से समझ सकें और कोई भी बीमारी शुरू होने से पहले ही आप उसका उपचार ढूंढ सकें। मई का महीना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सबसे कमजोर महीना साबित हो सकता है। इस दौरान आपको छाती या फेफड़ों का संक्रमण हो सकता है या सर्दी लगने से निमोनिया की शिकायत भी हो सकती है। इस दौरान आपको यदि आराम ना पड़े तो डॉक्टर बदलने की सलाह भी हमारी तरफ से दी जा रही है। जून-जुलाई में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा और स्वास्थ्य संबंधित किसी पुरानी समस्या से आपको निजात भी मिल सकती है। अगस्त से सितंबर के बीच अपना ध्यान ना रखने और लापरवाही वाला रवैया अपनाने से आपको कुछ सामान्य शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है इसलिए यदि आप अच्छा खानपान रखते हैं तो बहुत हद तक समस्याओं से बच सकते हैं। नवंबर और दिसंबर के महीने स्वास्थ्य में सुधार की ओर संकेत देते हैं।

2023 में कर्क राशि के लिए भाग्यशाली अंक

कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा है और कर्क राशि के जातकों का भाग्यशाली अंक 2 और 6 माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार 2023 राशिफल बताता है कि, वर्ष 2023 का कुल योग 7 होगा। इस प्रकार यह वर्ष कर्क राशि के जातकों के लिए मध्यम से थोड़ा बेहतर साबित हो सकता है और आपके लिए कई बार अनुकूल योग भी निर्मित करेगा। आपके सामने कई चुनौतियां उपस्थित रहेंगी लेकिन वे चुनौतियां आपकी अपनी गलतियों और लापरवाही के कारण हो सकती है। आप अपने ज्ञान और धार्मिक विश्वास के बल पर अपनी परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको स्वयं पर भरोसा रखना होगा।


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कर्क राशिफल 2023: ज्योतिषीय उपाय

आपको पूर्णिमा का व्रत रखना चाहिए।

सोमवार के दिन भगवान शिव के चंद्रशेखर स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।

श्री शिव सहस्त्रनाम स्तोत्र या शिवाष्टक का पाठ करना भी लाभदायक रहेगा।

सोमवार का व्रत करना आपको निरोगी बनाएगा और व्यापार में उन्नति प्रदान करेगा।

आपको उत्तम गुणवत्ता वाला मोती रत्न धारण करना बहुत लाभदायक रहेगा। इस रत्न को आप कनिष्ठिका अंगुली में शुक्ल पक्ष के दौरान सोमवार के दिन धारण कर सकते हैं।

यदि आप किसी कठिन समस्या से जूझ रहे हैं या बीमार हैं तो आपके लिए श्री शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना लाभदायक रहेगा।



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